मनुष्य की हथेली पर और अँगुलियों पर, पर्वतों पर, रेखाओं आदि पर जो चिन्ह पाए जाते हैं उन्हें पहचानना आसान होता है और इनकी आकृति और आकार की पहचान भी आसानी से की जा सकती है।
हस्त रेखा शास्त्र के इस अध्याय में इन्हीं चिन्हों के बारे में और इन चिन्हों के आधार पर व्यक्ति के जीवन के शुभ-अशुभ फल के बारे में जानकारी दी गई है और किसी व्यक्ति को कुछ बताने से पहले इन चिन्हों को भी ध्यान से देखना चाहिए तभी फलादेश कहना चाहिए। ये चिन्ह भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
# वर्ग
# बिंदु
# वृत्त
# कोण
# त्रिभुज
# गुणक
# रेखाजाल
# द्वीप
# तारे
#वर्ग - वर्ग और समकोण चतुर्भुज चौकोना होता है। इसे शुभ फल देने वाला माना जाता है अगर यह चिन्ह किसी पर्वत या रेखा पर हो तो इससे व्यक्ति को अशुभ घटनाओं, रोगों विघ्नबाधाओं और खतरों से सुरक्षित होने का संकेत मिलता है।
- वर्ग का निशान गुरु पर्वत पर हो तो यह व्यक्ति के प्रतिष्ठावान होने को दर्शाता है और बुरे प्रभावों को कम करता है। ऐसे व्यक्ति में शासन करने की क्षमता होती है।
- शनि पर्वत पर यह चिन्ह हो तो या शुभ फल देने वाला और मृत्यु समान कष्ट से रक्षाकर्ता होता है।
- सूर्य पर्वत पर इस चिन्ह की उपस्थिति से यश, मान और धन में वृद्धि और व्यवसाय और राज्य से लाभ दिलाती है।
- बुध पर्वत पर यदि ये वर्ग का निशान दिखे तो अकस्मात लाभ के योग होते हैं नए कार्यों की खोज और सहयोग मिलता है।
- मंगल पर्वत पर इसका होना शुभ फलदायी और जमीन एवं स्त्री सुख को प्राप्त कराने वाला होता है।
- चन्द्र पर्वत पर वर्ग का निशान होने पर संकटों से रक्षा होती है और कल्पनाशक्ति बढती है।
- शुक्र पर्वत पर यह चिन्ह हो तब प्रीति में वृद्धि और अचानक व्यक्ति-विशेष से सहयोग की प्राप्ति होती है।
- खंडित जीवन रेखा को जोड़ने वाला वर्ग, व्यक्ति को रोगों से बचाता है।
# वृत्त – यह प्रभावी रेखाओं से बनी गोलाकार आकृति होती है।
- गुरु पर्वत पर वृत्त- यह चिन्ह यश, मान व प्रतिष्ठा तथा धार्मिक, लेखन-प्रवचन आदि की क्षमता को बढ़ाने वाला होता है।
- शनि पर्वत पर वृत्त- व्यक्ति को अकस्मात धन-लाभ और खनिज व लोहे के व्यवसाय से लाभ होता है।
- सूर्य पर्वत पर वृत्त- विदेश-भ्रमण, प्रतिष्ठा-वृद्धि और व्यवसाय व राज्य पक्ष से लाभ।
- बुध पर्वत पर वृत्त- व्यर्थ के विवाद एवं जल्दबाजी में लिए गए निर्णय से फालतू व्यय।
- मंगल पर्वत पर वृत्त- उग्र स्वाभाव और स्वयं के निर्णय से हानि।
- चन्द्र पर्वत पर वृत्त- यात्रा में कष्ट और जल से भय।
- शुक्र पर्वत पर वृत्त- सहयोग से कला के क्षेत्र में और प्रेम-प्रीति में सफलता।
- वृत्त के अन्दर लाल रंग का होना- स्त्री का गर्भवती होना।
- हथेली के मध्य में वृत्त- झगड़ा होने का भय।
# कोण – यह चिन्ह भी प्रभावी रेखाओं के मिलने से बनता है।
- गुरु पर्वत पर कोण: व्यक्ति की प्रतिष्ठा में बृद्धि और विचार-शक्ति व धार्मिक प्रवृत्ति का सूचक।
- शनि पर्वत पर कोण: व्यक्ति किसी के अधीन रह कर कार्य नहीं करता।
- सूर्य पर्वत पर कोण: भावुक स्वाभाव का सूचक और ऐसा व्यक्ति सहयोग को प्राथमिकता देता है।
- बुध पर्वत पर कोण: व्यक्ति स्वार्थी व जल्दबाजी में निर्णय लेने वाला होता है।
- मंगल पर्वत पर कोण: अदालती संकट को खड़ा करने का सूचक और व्यक्ति को अपने जिद्दीपन की वजह से बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
- चन्द्र पर्वत पर कोण: व्यक्ति सहयोग का इच्छुक होता है।
- शुक्र पर्वत पर कोण: आमोद-प्रमोद पर विशेष खर्च का सूचक।
- कोई रेखा इसके अन्दर से होकर निकलती है और सूर्य पर्वत को छूती है तो व्यक्ति को किसी उच्च अधिकारी के सहयोग से लाभ की प्राप्ति होती है।
- शनि पर्वत के नीचे कोण: व्यक्ति गुप्त विद्याओं का ज्ञान रखने वाला।
- जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा से बना कोण: व्यक्ति सभ्य व सुशिक्षित होता है।
# त्रिभुज – तीन रेखाओं से मिल कर त्रिभुज की आकृति बनती है। यह शुभ फलदायक होती है।
- गुरु पर्वत पर त्रिभुज: राज्य, व्यवसाय, स्त्रीपक्ष से लाभ व उच्च पद को पाने का सूचक होता है।
- शनि पर्वत पर त्रिभुज: अचानक यश व धन की प्राप्ति का सूचक और गुप्त विद्याओं का ज्ञाता।
- सूर्य पर्वत पर त्रिभुज: व्यक्ति अनुसंधानकर्ता व चिकित्सक बनता है और उसे औषधीओं के व्यापार से लाभ प्राप्त होता है और यश मान व प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
- बुध पर्वत पर त्रिभुज: व्यक्ति अच्छा वक्ता और राजनैतिक क्षेत्र से लाभ की प्राप्ति।
- मंगल पर्वत पर त्रिभुज: ऐसा होना शुभ लक्षण माना गया है। व्यक्ति को जमीन, सेना व मशीनरी से लाभ की प्राप्ति होती है।
- शुक्र पर्वत पर त्रिभुज: व्यक्ति प्रेम-प्रीति के मामलों में गलत निर्णय लेने वाला और गणितज्ञ।
- चन्द्र पर्वत पर त्रिभुज: व्यक्ति यात्रायें करना पसंद करता है और गुप्त विद्याओं से लाभ लेता है।
- जीवन रेखा पर त्रिभुज: व्यक्ति अपने पुरुषार्थ से धन, भूमि व ऐश्वर्य प्राप्त करता है।
- जीवन-रेखा, मस्तिष्क-रेखा व स्वास्थ्य-रेखा मिलकर त्रिभुज बनायें और हाथ स्पष्ट और चौड़ा हो: व्यक्ति उत्साही, उदर हृदय वाला, भाग्यवान तथा दीर्घायु वाला होता है। अगर त्रिभुज छोटे आकार का है तो व्यक्ति चरित्रहीन और कायर होता है।
# गुणक – दो प्रभावी या गौण रेखाएँ एक दूसरे को इस प्रकार काटें कि गुणा की आकृति बने तो इसे गुणक कहा जाता है।
- गुरु पर्वत पर गुणक का निशान: व्यक्ति स्पष्ट वक्ता और उसका सुखी दाम्पत्य जीवन।
- शनि पर्वत पर गुणक का निशान: व्यक्ति की मानसिक अस्थिरता और संतान से प्रतिकूलता।
- सूर्य पर्वत पर गुणक का निशान: व्यक्ति का भाग्य परीक्षक खेलों में रूचि जैसे जुआ, सट्टा आदि और उसके किसी कार्य के बनने में रुकावटें।
- बुध पर्वत पर गुणक का निशान: व्यक्ति की कम सहनशील और गलत कार्यों में रूचि रखने वाला।
- मंगल पर्वत पर गुणक का निशान: निरर्थक विवाद होने और अशुभ फल देने का सूचक।
- चन्द्र पर्वत पर गुणक का निशान: स्वास्थ्य सम्बन्धी प्रतिकूलता और मानसिक अस्थिरता का सूचक।
- शुक्र पर्वत पर गुणक का निशान: व्यक्ति का आदर्शवादी होना और सेक्स की ओर ज्यादा ध्यान देने वाला। और प्रेम या दुःखदायी विवाह का भी सूचक होता है ये चिन्ह।
- हृदय रेखा पर गुणक का निशान: व्यक्ति का प्रेमी से वियोग।
- चन्द्र स्थान के बीच गुणक का निशान: गठिया रोग का संकेतक।
# रेखाजाल – तीन या अधिक आड़ी (horizontal) रेखाएँ, तीन या तीन से अधिक खड़ीं (vertical) रेखाओं को कट करें और एक जाल की आकृति का निर्माण करें तो ऐसी आकृति रेखाजाल कहलाती है।
- गुरु पर्वत पर रेखाजाल: जिद्दी स्वाभाव व जमीन या वाहन से हानि।
- शनि पर्वत पर रेखाजाल: कार्य में विलम्ब और जीवन के उत्तरार्ध में हानि।
- सूर्य पर्वत पर रेखाजाल: अत्यधिक सम्मानित होने के कारण काम में बाधा पड़ना।
- बुध पर्वत पर रेखाजाल: स्वार्थी व जुए, सट्टे में धन बर्बाद करने वाला।
- मंगल पर्वत पर रेखाजाल: जमीन-व्यवसाय पक्ष में झगड़ा और व्यर्थ का विवाद खड़ा करने वाला।
- चन्द्र पर्वत पर रेखाजाल: यात्रा-प्रेम तथा सीधी रेखा होना विदेश-भ्रमण का संकेतक।
- शुक्र पर्वत पर रेखाजाल: विपरीत लिंग से मित्रता और आमोद-प्रमोद पर व्यय का सूचक।
# द्वीप – किसी स्पष्ट रेखा का कुछ दूर चल कर दो भागों में बंट जाना और थोड़ी दूर जा कर एक अंडाकार आकृति का निर्माण करते हुए पुनः मिल जाना और इस प्रकार जो अंडाकार आकृति बनती है उसे द्वीप कहते हैं।
- गुरु पर्वत पर द्वीप: झगडालू स्वाभाव, अपशय व धन की हानि।
- शनि पर्वत पर द्वीप: गलत कार्य करने वाला व शंकालू स्वाभाव का।
- सूर्य पर्वत पर द्वीप: किसी कार्य में दोस्तों व रिश्तेदारों की वजह से रुकावटें आने की सम्भावना।
- बुध पर्वत पर द्वीप: रिश्तेदारों से गलत सम्बन्ध रखने वाला, बेईमान स्वाभाव का।
- मंगल पर्वत पर द्वीप: आत्महत्या का विचार रखने वाला और या चिन्ह अदालती विवाद का सूचक।
- चन्द्र पर्वत पर द्वीप: स्मरण शक्ति की कमी व निरर्थक यात्रा का सूचक।
- शुक्र पर्वत पर द्वीप: प्रलोभन की प्रवृत्ति व प्रेम-प्रीति में विरोध का सूचक।
- भाग्य रेखा पर द्वीप: किसी व्यक्ति-विशेष के प्रलोभन जाल में फसने का संकेतक।
- विवाह रेखा पर द्वीप: पति-पत्नी के वियोग को दर्शाने वाला।
- जीवन रेखा पर द्वीप: बीमारी का सूचक।
- मस्तिष्क रेखा के नीचे भाग पर द्वीप: अन्य जाति के व्यक्ति से प्रेम सम्बन्ध।
- जीवन रेखा व मस्तिष्क रेखा के जोड़ पर द्वीप: प्रेम में झगड़ा दर्शाता है।
- भाग्य रेखा के प्रारंभ में द्वीप: यह शुभ नहीं होता, माता या पिता के वियोग को दर्शाता है यदि स्त्री के हाथ में हो तो प्रलोभन या लालच में फंसने का संकेतक होता है।
# तारे या नक्षत्र – दो से अधिक गौण रेखाओं का एक दूसरे को इस तरह से कट करना की एक केंद्र बने और यह आकृति तारे के समान दिखाई दे तो इसे नक्षत्र कहते हैं।
- गुरु पर्वत पर: अगर तारे की आकृति गुरु पर्वत पर दिखे तो ऐसे व्यक्ति को अचानक से उच्च पद की प्राप्ति को दर्शाता है और ऐसा व्यक्ति महत्त्वाकांक्षी होता है।
- शनि पर्वत पर: शनि पर्वत पर तारे का स्थित होना शुभ नहीं समझा जाता और यह कार्य में होने वाले विलम्ब का प्रतीक होता है।
- सूर्य पर्वत पर तारा: यह मान-सम्मान, यश व प्रतिष्ठा बढ़ने और अचानक धन लाभ की स्थिति होने को दर्शाती है।
- बुध पर्वत पर तारा: ऐसी स्थिति व्यक्ति के विलक्षण मस्तिष्क-शक्ति को दर्शाती है ऐसा व्यक्ति स्वयं की बुद्धि से कार्य करता है।
- मंगल पर्वत पर तारा: इसमें क्रय-विक्रय से लाभ एवं स्वयं के नाम से व्यापार, जमीन, वाहन अथवा संपत्ति के खरीद-बेच को दर्शाती है।
- चन्द्र पर्वत पर तारा: यह मानसिक अस्थिरता, व्यर्थ की यात्रा और जल से भय की सूचक होती है।
- शुक्र पर्वत पर तारा: प्रेम प्रीति में समय का फालतू बर्बाद होना और साथ ही धन की व्यर्थ बर्बादी को दर्शाती है।
- हृदय रेखा पर तारा: दिल की बीमारी को दर्शाती है।
- वर्ग के अन्दर तारा: खतरे से रक्षा होती है।
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